राधाष्टमी विशेष
राधाष्टमी विशेष (राधा तत्त्व)
श्री कृष्ण का स्मरण होते ही मानस पटल पर श्री राधा की छवि अनायास ही आ जाती है। दोनों का परस्पर ऐसा अभिन्न सम्बन्ध है कि एक का नाम लेते ही दूसरे का स्मरण स्वाभाविक रूप से हो जाता है।
विशेषकर ब्रजभूमि में तो राधा-नाम की मधुरता हर ओर अनुभव होती है, मानो ब्रज की पहचान ही राधा के नाम से हो। वहाँ की हर गलियों में केवल एक ही नाम सुनाई देता है... राधे राधे राधे।
किन्तु श्री राधा के नाम और महिमा से परिचित होने के बाद भी राधा-तत्त्व के वास्तविक स्वरूप को पूर्णरूप से जानने वाले बहुत कम हैं। अधिकांश लोग श्री राधा को केवल श्री कृष्ण की प्रेयसी के रूप में ही जानते हैं एवं उनके वास्तविक स्वरूप से अनभिज्ञ हैं।
श्री राधा वह तत्त्व हैं, जिनसे परे कोई तत्त्व नहीं। समस्त दैवीय शक्तियाँ जिनसे प्रकट होती हैं, जो अखिल ब्रह्माण्ड के नायक पूर्णतम पुरुषोत्तम परब्रह्म श्री कृष्ण की भी स्वामिनी हैं और जिनकी आराधना स्वयं श्री कृष्ण करते हैं
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने श्री राधा-तत्त्व का विश्वव्यापी प्रचार किया और श्री राधा के नाम, रूप, लीला एवं गुणों का गान ही साधना का आधार बताया। उनके द्वारा प्रणीत ग्रन्थों तथा प्रवचनों में श्री राधा की महिमा और उनके तत्त्व का विस्तृत निरूपण मिलता है। उनके ही प्रवचनों के आधार पर राधा तत्त्व पुस्तक का प्रकाशन किया गया है जिसमें राधा तत्त्व की गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला गया है -
• ‘राधा’ शब्द का वास्तविक
• राधा और कृष्ण का संबंध
• क्यों हैं श्री राधा श्री कृष्ण की आत्मा
• अद्वितीय तत्त्व - श्री राधा
• पराशक्ति क्यों हैं श्री राधा
इस राधाष्टमी पर राधा तत्त्व नामक पुस्तक अवश्य पढ़ें और इसके माध्यम से श्री राधा के अद्वितीय स्वरूप को जानने का प्रयास करें।
राधा-तत्त्व jkpliterature.org.in पर उपलब्ध है, आज ही आॅर्डर करें।
श्री राधारानी कीर्तिकुमारी (राधाष्टमी)
श्री कृष्ण के प्राकट्य और उनकी नटखट बाल-लीलाओं से तो अधिकांश लोग परिचित हैं, किन्तु वृषभानुसुता श्री राधारानी के प्राकट्य और उनकी मनभावनी बाल-लीलाओं से बहुत कम लोग परिचित हैं।
श्री राधारानी का प्राकट्य कैसे हुआ? उनके प्राकट्य के समय कौन-कौन-सी दिव्य घटनाएँ घटित हुईं? उनके दर्शन हेतु कौन-कौन-सी दैवीय शक्तियाँ पधारीं और उन्होंने किस प्रकार गौरांगी श्री राधा का अभिनन्दन किया? उनके जन्म और बाल्यकाल से जुड़े ऐसे अनेक दिव्य एवं अनसुने प्रसंग हैं, जिनके विषय में जानने की सहज ही जिज्ञासा उत्पन्न होती है।
श्री राधारानी के प्राकट्य के अतिरिक्त माँ कीर्ति एवं वृषभानु जी के आँगन में श्री राधा की मनभावनी बाल-लीलाएँ, उनकी विचित्र प्रकार की जिद्द तथा उनके बाल्यकाल की अनेक लीलाओं का मधुरातिमधुर एवं रससिक्त वर्णन ‘श्री राधारानी कीर्तिकुमारी’ पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज पद-व्याख्या के माध्यम से इन लीलाओं का ऐसा सजीव वर्णन करते थे कि वे लीलाएँ बरबस मानस-पटल पर अंकित हो जाती थीं। उन्हीं समस्त व्याख्याओं को बड़े रोचक ढंग से इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है।
यदि कोई एक बार पुस्तक पढ़ना प्रारम्भ कर देता है तो मधुरातिमधुर लीलाओं को पढ़ते-पढ़ते मन में आगे के प्रसंग को जानने की उत्सुकता बनी रहती है। और कब पुस्तक समाप्त हो जाती है, पता ही नहीं चलता।
आज ही पुस्तक पढ़ें और इस राधाष्टमी पर अवश्य जानें श्री राधारानी के जीवन के इन दिव्य प्रसंगों को।
श्री राधारानी कीर्तिकुमारी पुस्तक jkpliterature.org.in पर उपलब्ध है।