भक्ति रस सिन्धु
हमारे देश में, हर जाति के, हर धर्म के लोग निवास करते हैं। और हर दूसरे या तीसरे दिन कोई न कोई त्यौहार होता है।
विश्व के पाँचवें मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज सभी धर्मों के त्यौहारों को बड़े हर्ष और उल्लास से मनाते थे और आज भी जगद्गुरु कृपालु परिषत् के सभी केन्द्रों में हर त्यौहार मनाये जाते हैं। विभिन्न त्यौहारों पर श्री महाराज जी के श्री मुख से नये-नये कीर्तन स्वतः ही निःसृत होते थे। किसी भी पर्व से सम्बन्धित पद, दाेहे, संकीर्तन की रचना वे हास-परिहास करते हुए, लोगों के मध्य बैठकर ही कर देते। और उन समस्त रचनाओं में शास्त्रों, वेदों का सार समाहित होता है।
श्री महाराज जी कहते थे कि सभी पर्वों को मनाने का एक ही उद्देश्य है कि हमारा मन संसार से हटकर भगवान् में लगे।
जे. के. पी. लिटरेचर द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘भक्ति रस सिन्धु’ में श्री महाराज जी द्वारा रचित विभिन्न त्यौहारों से सम्बन्धित सभी संकीर्तनों का संकलन किया गया है। जिससे पर्व के अनुसार पाठक संकीर्तन के गायन और उसके पठन से भक्ति के रस में डूब सके। इन समस्त संकीर्तन में अद्भुत सौरस्य है, अनुपम प्रेम प्रज्ज्वलन शक्ति है। कोई भी जब इन कीर्तनों को एकांत में ध्यानपूर्वक पढ़ता है या सुनता है तो मानो वह एक अलग ही जगत् में प्रवेश कर जाता है। मन शांत हो जाता है और एक असीम आनन्द की अनुभूति होती है।
इन सभी संकीर्तनों की धुन भी श्री गुरुदेव ने स्वयं बनाई है। जगद्गुुरु श्री कृपालु जी महाराज के ऑफिशियल यू.ट्यूब चैनल पर इन संकीर्तनों की आॅडियो और वीडियो भी उपलब्ध हैं जिससे साधक इनको पढ़कर श्री गुरुदेव द्वारा बनाई धुन के अनुरूप इनका गान कर सके।
यह भक्ति रस सिन्धु पुस्तक सभी भगवत्प्रेमी जनों के लिये बहुत ही उपयोगी है। अब हर त्यौहार के संकीर्तन ढूँढ़ने के लिये हमें कहीं और जाने की जरूरत नहीं केवल एक पुस्तक से ही हम सारे संकीर्तन को आसानी से गा सकते हैं आैर अपने इष्टदेव को प्रसन्न करने का प्रयास कर सकते हैं।
jkpliterature.org.in पर भी यह पुस्तक उपलब्ध है आज ही ऑर्डर करें।