मुझे मिली डर से मुक्ति
मेरे मन में एक अनजाना-सा डर होता था, मैं बहुत व्यग्र और चिन्तित रहता था। या तो भविष्य की चिंता का डर, मृत्यु का डर, किसी को खोने का डर, न जाने क्या कारण था। मैं भीतर ही भीतर उससे जूझता रहता और डर के साये में जीता रहा। इस डर के कारण मेरा मन हमेशा मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान रहता था। मै अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहा था कि मैं शान्ति से जिऊँ और मैंने बहुत उपाय किये, मेडिटेशन किया, अनेकों किताबें पढ़ी लेकिन पूर्ण रूप से मेेरे मन से वह डर नहीं गया।
मैं बैठा-बैठा यू-ट्यूब पर कुछ देख रहा था कि मुुझे jkpliterature चैनल पर एक पोस्ट दिखाई दी। और उस पोस्टर में मैंने एक वाक्य पढ़ा “डर इसलिये है क्योंकि तुम भूल गये हो- वो हमेशा तुम्हारे साथ है।” फिर एक ओर लाइन पर नजर गई “वे हमारी रक्षा करते हैं, कर रहे हैं, और आगे भी करेंगे, इस पर विश्वास कर लो।” मैं उसे पूरा पढ़ता गया और ऐसा लग रहा था कि ये तो वही प्रश्न हैं जिसका उत्तर मैं खोज रहा हूँ। इन अनमोल उपदेशों के साथ ही एक पुस्तक भी साथ में मुझे दिखाई दी जिसका नाम था ‘भगवद् भक्ति’ और उस पर लेखक का नाम लिखा हुआ था जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज।
अब मुझे समझ आया कि यह वाक्य महान सन्त जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के हैं। एक वाक्य को पढ़ने से मेरे मन को बहुत सुकून मिला लेकिन और अधिक जानने की इच्छा हुई कि कौन हमारी रक्षा कर रहा है, कौन हमारे साथ सदा रहता है। मैंने बिल्कुल भी देर नहीं की और नीचे दी गई लिंक jkpliterature पर जाकर तुरंत यह पुस्तक आर्डर कर दी।
मैं पुस्तक का बेसब्री से इंतजार करने लगा। जैसे ही पुस्तक आई मैंने सबसे पहले जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज को प्रणाम किया और पुस्तक को पढ़ना शुरू कर दिया। पुस्तक के कुछ ही पन्ने पढ़े कि मेरे मन का कोलाहल, मेरा डर जैसे धीरे-धीरे शांत होने लगा। मैं पुस्तक में ऐसा खो गया कि मैंने एक दिन में ही पूरी पुस्तक पढ़ ली।
अब मुझे समझ आया कि भगवान् की भिक्त करने से किसी तरह का कोई डर नहीं रहता। भगवान् तो हमारे सर्वसमर्थ रक्षक हैं और वे ही हमारे सच्चे साथी हैं, वे सदा हमारी रक्षा करते हैं। वे कभी हमारा साथ नहीं छोड़ते, हम जिस योनि में जायें।
बस फिर क्या था मैंने जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज के एक-एक वाक्य को अपने जीवन में अमल करना प्रारम्भ कर दिया। उनके द्वारा जो भक्ति का इतना सरल और सुन्दर निरूपण किया गया था उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। और अब मैं भी उनके द्वारा बताये भक्ति मार्ग की ओर चल पड़ा। इतने वर्षों का जो डर था, जो चिंता थी वो शान्त हो गई। और इस पुस्तक ‘भगवद् भक्ति’ से मेरा जीवन ही बदल गया।